Monday, May 25, 2009

नामुमकिन नही

तेरे बगैर जिंदगी जीना ....
मुश्किल है, नामुमकिन नही

टूटे दिल का इलाज करना....
मुश्किल है, नामुमकिन नही

तेरी यादों को भुला पाना ....
मुश्किल है, नामुमकिन नही

तेरी जगह, किसी और को देना ...
मुश्किल है, नामुमकिन नही

आँसुओं को आंखों में रोकना ....
मुश्किल है, नामुमकिन नही

चहेरे पर झूठी हँसी लाना ....
मुश्किल है, नामुमकिन नही

तेरी खुशी के लिए इतना करना ....
मुश्किल है, नामुमकिन नही

हर मुश्किल को आसां करना ...
मुश्किल है, नामुमकिन नही


नामुमकिन को मुमकिन करना ...
मुश्किल है, नामुमकिन नही



15 comments:

  1. Yatharthwadi hona hi kahi acchhaa hain apne jale dil ke dhuay main rehne se ,Bahut badhiya raha Tushar Bhai , keep it up .

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  2. Thank u very much, Kartikay, for encouraging comments.

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  3. wow uncle poems like this will surely make some ecourage...good jo.....keep it up...

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  4. नामुमकिन को मुमकिन करना ...
    मुश्किल है, नामुमकिन नही
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ है।
    सादर
    अमित

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  5. vaah tushaar bhaayi...sach to yah bhi mushkil hai kuchh bhi rachnaa....naamumkin nahin..!!

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  6. हिंदी ब्लॉग की दुनिया में आपका स्वागत है.....

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  7. बुद्धम शरणं गच्छामि................
    दो पल सुख से सोना चाहे पर नींद नही पल को आए
    जी मचले हैं बेचैनी से ,रूह ना जाने क्यों अकुलाए
    ज्वाला सी जलती हैं तन मे ,उम्मीद हो रही हंगामी .....
    बुद्धम शरणं गच्छामि................

    मन कहता हैं सब छोड़ दूँ मैं पर कैसे छुटेगा यह
    लालच रोज़ बदता जाता हैं ,लगती दरिया सी तपती रेत
    एक पूरी होती एक अभिलाषा ,खुद पैदा हो जाती आगामी......
    बुद्धम शरणं गच्छामि................

    नयनो मे शूल से चुभते हैं, सपने जो अब तक कुवारें हैं
    कण से छोटा हैं ये जीवन और कर थामे सागर हमारे हैं
    पागल सी घूमती रहती इस चाहत मे जिन्दगी बे-नामी........
    बुद्धम शरणं गच्छामि................

    ईश्वर हर लो मन से सारी, मोह माया जैसी बीमारी
    लालच को दे दो एक कफ़न ,ईर्ष्या को बेबा की साडी
    मैं चाहूँ बस मानव बनना ,मांगू कंठी हरि नामी ....

    बुद्धम शरणं गच्छामि................
    @कवि दीपक शर्मा
    http://www.kavideepaksharma.co.in
    http://kavideepaksharma.blogspot.com
    http://kavyadhara-team.blogspot.com

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  8. आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . आशा है आप अपने विचारो से हिंदी जगत को बहुत आगे ले जायंगे
    लिखते रहिये
    चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है
    गार्गी

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  9. namaskar mitr,

    aapki kavitayen padhi , sab ki sab behatreen hai .. aapki kavitao me jo bhaav hai ,wo bahut hi gahre hai ..

    aapko badhai .. prem aur dosti ke upar likhi gayi ye kavita acchi lagi ..

    dhanywad.

    meri nayi kavita " tera chale jaana " aapke pyaar aur aashirwad ki raah dekh rahi hai .. aapse nivedan hai ki padhkar mera hausala badhayen..

    http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/05/blog-post_18.html

    aapka

    Vijay

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  10. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  11. Really fantastic ! I have least knowledge & capability in Hindi. But I see you through different eye henceforth. Undergone all the poems, could read, could understand but can not express myself properly. You may publish a book and send me a copy. I will purchase it at my cost. Thanks friend & lot of Regards too.
    ashis, 07/01/10.

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  12. Dada......Zindagi me AAP aur aap ka sundar kavitha vonko bhoolna .........Mushkil bhi hai aur Namunkin bhi hai.

    This poem gave emotional & positive message - Impossible is Nothing.

    Great...with regards.

    Geetha Pujar

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