Saturday, June 6, 2009

बेटी बोली

माँ की कोख से बेटी बोली,
मुझे भी जन्म लेने दे, माई।
मै भी तेरे काम आउंगी,
मुझ पे भरोसा रख तू , माई।

मुझको भी तू भाई की तरह,
स्कूल-कोलेज में भेजना, माई,
पढ़-लिखकर, काबिल बनकर,
पैरों पे अपने खड़ी होउंगी, माई।

कराटे, जूडो, मार्शल आर्ट
सब सीखूंगी भाई के साथ।
अपनी रक्षा ख़ुद करुँगी,
तू मत कर चिंता , माई।

अपने लिए लड़का भी,
तू कहे तो, ख़ुद ही ढुँड लुंगी , माई।
शादी और दहेज़ का खर्चा भी,
अपनी कमाई से जोड़ लुंगी, माई

बुढापे में आप और तात,
मेरे घर में रहेना, मेरे साथ,
बुढापे की लाठी बनुंगी,
बिल्कुल सच कहती हूँ , माई।

ये तो सोच तू ,मेरी माई,
सब करे तेरे जैसा, माई,
बेटे जनने के लिए कहाँ से
फ़िर मिलेगी कोई माई?

इसी लिए कहती हूँ ,माई
मुझको भी जन्म लेने दे, माई.

7 comments:

  1. wow thts amazing poem , u covered all the points tushar ji ..... parul

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  2. प्रवीण शुक्ल (प्रार्थी) said...

    tushar ji aapne bahut hi sarthak vishay ko apni kavita me uthaya hai aaj kal isi tarah ki sarthak kavitaye likhi jani chaiye
    June 7, 2009 10:25 AM
    Tushar said...

    Thank u Pravin ji

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  3. Absolutely great,

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  4. You seem to me alike " Chupa Rustam " friend. I salute your spirit and ability, especially in Hindi. Pl keep it up.

    ashis, 07/01/10.

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  5. Dada....U have done a wonderful job. I cannot say all these things to my parents & U have expressed each & everything in this small poem !!!

    This poem is never finished, only abandoned. Great.. I feel proud, to have U. Thanks for sharing.

    Geetha

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  6. wah !! kya kahna hai aapke shabdo me jaadoo hai...))...Manju.

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